धधकते आज शहरों से किनारा कर लिया मैंने
अब अपने गांव में रहकर गुजारा कर लिया मैंने
चमकती सड़के ना देखी न देखी तीव्रतम चाले
अंधेरी गलियों में अपने उजाला कर लिया मैंने
लगायी प्रीति है उनसे जो है दिल में मेरे बैठे
मिलाकर उनसे दिल अपना सहारा कर लिया मैंने
न कोई दिल में चिंता है न कोई मन में है उलझन
अभी तक जिस में उलझा था उसे सुलझा लिया मैंने
चुभे काटे दिलों में जो उसे तो दूर करता हू
सदा मुस्कान कलियों की दिलों में भर लिया मैंने
भाग्य जीवन का ना मेरे कहीं फिर से बिखर जाए
भाव पावन हमेशा ही दिलो का कर लिया मैंने
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


