विस्तृत लिखना भले कठिन हो
कम लिखना तो बहुत कठिन है
भाव उजागर हो जाए मन का
शब्द पिरोना बहुत कठिन है
भरा हो शब्दों में भाव जितना
उसे समझना बहुत कठिन है
उमड़ रही भावना हृदय की
पटल पर लाना बहुत कठिन है
लिखा है वेद रिचाओ में जो
परख सर्जना बहुत कठिन है
सकल चराचर में जो समाये
उन्हें दिखाना बहुत कठिन है
परंपरा जो बनी है जग में
संजोए रखना बहुत कठिन है
बिन मौसम वसंत ऋतु आए
भाव जगाना बहुत कठिन है
बदल ही जाता समय समय पर
समय बदलना बहुत कठिन है
जो रख हथेली पे सच को बोले
फरिश्ता मिलना बहुत कठिन है
जो राह सच के ही द्वार जाए
ओ राह चलना बहुत कठिन है
भले ही देखे हो आंख से पर
जुबां खोलना बहुत कठिन है
धनो में डूबा है रात दिन जो
निभाना रिश्ता बहुत कठिन है
आंसू पी लेना भले सरल हो
पीकर मुस्काना बहुत कठिन है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


