आज से बस मेरी हो

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने की
स्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने की
आंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी है
स्वार्थ में डूब कर के जिद ना कर निकलने की
अब तो मसला भी दिलो का बहुत गमगीन हुआ
कोई तरकीब निकालो सदा ही मिलने की
कभी हंसता तो कभी दिल ये मेरा रोता है
सोच कर के सदा ही बात साथ रहने की
जिंदगी साथ में अपने ही बिताने दो मुझे
मुझको दे दो इजाजत अब तो पास आने की
मेरी भी जिंदगी बीते सदा ही हंसते हुए
कोई तो मुझको वजह दे दो मुस्कुराने की
भले ही डूब कर के स्वार्थ में मिली थी मुझे
मगर ना होना कभी छोड़कर बेगाने की
लाके किस मोड़ पर तूने मेरा दिल तोड़ा है
बनी ना मेरी कभी ना मुझे बनाने दी

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रचनाकार

Author

  • गिरिराज पांडे

    गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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