सूनापन एकांतवास एक बातें जैसी दिखती हैं
सूनापन एकांतवास में बहुत भिन्नता होती है
एकांतवास तो जीवन का वरदान हमेशा होता है
सूनापन तो जीवन का अभिशाप हमेशा होता है
एकांतवास से जीवन को आराम बहुत ही मिलता है
सूनापन तो जीवन में छटपटाहट ही देता है
घबराहट तो सूनेपन से सदा सभी को होती है
शांति सदा इस जीवन में एकांतवास से मिलती है
बाहर ही रहती नजर हमेशा सूनापन कहलाता है
अंतर्मुखी हुई जब नजरें तो एकांतवास कहलाता हैं
मनुष्य अकेले सूनापन से जब एकांत की यात्रा करता है
उसकी यही यात्रा ही एकांतवास कहलाता है
मंजिल राही और रास्ता जब वही स्वयं बन जाता है
तब सूने पन से एकांतवास में वही मनुष्य आ जाता है
फिर बाहर दिखता नहीं उसे कुछ सब अंदर ही दिख जाता है
वाह्य दृष्टि जब बदल गई तो अंतर्मुखी हो जाता है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


