जिसने जीवन को संवारा है मेरे
वो ही जीवन का मेरे हकदार हो
गम में भी मैं मुस्कुरा कर के जियू
ऐसा ही मेरा यहां किरदार हो
कर्म से ही सबके दिल में बैठ जाऊं
स्वप्न दिल का हर मेरा साकार हो
आके फिर ना जाए जीवन से कभी
दिल का मेरे ऐसा ही मेहमान हो
ना अहम और ना वहम दिल में पले
ऐसा ही सुंदर मेरा संसार हो
ना छलावा ना दिखावा हो कभी
सत्य ही मुझको सदा स्वीकार हो
भाव में उमड़ी घटाएं जब घिरे
उससे तो बस प्यार की बरसात हो
बन गया जो जिंदगी में जिंदगी
जिंदगी का उसको ही अधिकार हो
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


