आंखों में प्यार लिए, होंठो पे मुस्कान लिए
भाव में भरी हुई, वो पास चली आती हैं
अंजन की धार लिए ,आंख में कटार लिए
सादगी का करके, सिंगार चली आती हैं
सांसों में बिखेर कर ,खुशबू वो प्यार की
दिल में वो भर के, बहार चली आती हैं
नींद में भी डूबे हुए, दिल में सजोए हुए
बनकर रातों का ,वो ख्वाब चली आती हैं
मतवाली चाल चले ,मादक नयन भरे
सब पे लुटाती अपना, प्यार चली आती हैं
प्रेम के ही नशे में , सबको मदहोश करके
छलकाती जैसे कि, शराब चली आती हैं
पूछते हैं लोग जब ,कि कैसा है मोहब्बत नशा
बन के हर प्रश्न का, जवाब चली आती हैं
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


