हुआ जन्म था जेल में उनका नंद बबा ने पाला था
सो गए पहरेदार वहां के खुला गेट का ताला था
काली रात अंधेरी में तो जमुना भी विकराल हुई
बढ़कर उनके चरण छुई तब जाकरके ओ शांत हुई
ग्वाल बाल सन्ग कृष्ण कन्हैया गोकुल में ही खेले थे
वृंदावन में गोपी के संग जाकर रास रचाये थे
संग विराजे राधा के पर रुक्मणी को अपनाए थे
चीर हरण पर जाकरके द्रुपदा की लाज बचाए थे
दूध दही को घर-घर जाकर श्याम ने यहां चुराया था
रोक रोक कर गोपी को भी अपने संग नचाया था
नंद बाबा की गउओ को भी हरदम यहां चराते थे
बैठ कदम की डाल पे हरदम बंसी मधुर बजाते थे
जूझ रहा था गोकुल पूरा संकट उसपर छाया था
तब जाकर गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली उठाया था
पूरा गांव इकट्ठा हो जब बैठा उसकी छाया में
तब जाकर खुशहाली छाई गोकुल के जनमानस में
रचनाकार
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गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


