रोज तूफानों से लड़कर मैं यहा
बुझते दीपक को जलाता रहता हूं
उठता मन में ज्वार भाटा जो मेरे
उसमें ही दिन भर नहाता रहता हूं
उड़ ना जाऊं आज तूफा से कहीं
पैर अंगद सा जमाता रहता हूं
नाव जीवन की फंसी मझधार में
हौसला मन का बढ़ाता रहता हूं
प्रीत दिल में जो जगी है अब मेरे
दिल से ही उसको निभाता रहता हूं
झकझोरता है मन हिलोरे मार कर
मन को समझाता हमेशा रहता हूं
इच्छा को अपनी दबाकर ही यहां
प्यास जीवन की बुझाता रहता हूं
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


