आज हम जलाएं प्रेम दीपक दिल के द्वार
जिससे प्रकाशित हो ये पूरा संसार
जग में अधेरा ना अज्ञानता का वास
सब के दिलों में भरे प्रेम का प्रकाश
भाव हो पावन सबका प्रखर विचार
सब के दिलों में बहे शीतल बयार
दया माया ममता हो दिल में अपार
प्रेम का ही दीपक जले सदा संसार
कर्म धर्म नीति का हो मन में निवास
भाव जागे दिल में सभी के दिन रात
प्रेम की बसे दिलों में खुशबू अपार
कभी ना बने किसी के जीवन में खार
अधरों पे रख अपने मधुर मुस्कान
कोमल हृदय में करें प्रेम का संचार
मन हो ना कुंठा न दूषित विचार
त्याग प्रेम दिल में ही भरा हो अपार
छल दंभ ईर्ष्या ना आए कभी पास
होती रहे प्रेम की सदा ही बरसात
धरती से लेकर के पूरा आकाश
छाया हो जगत में सदा ही उल्लास
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


