पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

प्राप्त है जितना वही पर्याप्त होना चाहिए

प्राप्त है जितना वही पर्याप्त होना चाहिए आंखों में आंसू नही मुस्कान होनी चाहिए गम में रहकर भी खुशी का भाव होना चाहिए एक सा

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प्यार बदला है

समय के साथ बदले यार,उनका प्यार बदला है, नहीं बदला तो केवल मैं,मेंरा अधिकार बदला है। वही हम हैं, वही हैं यार,जमाना भी वही है

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अपना बनाया क्यों,

दिया धोखा मुझे तुमने तो फिर अपना बनाया क्यों, कोई तुमको पसंद था और तो मुझको सताया क्यों। तुम्हारी मंजिलें थी क्या?था मकसद तुम्हारा क्या?

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स्पर्श

नहीं , मैं सागर नहीं हूँकि तुम्हारे द्वारा फेंके गयेशिला-खण्डों कोज्वार-भाटे के जबड़े में जकड़ लूँ ताल हूँतुम्हारा लघु पत्थर भीआन्दोलित कर जाता हैकेन्द्र से

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।। अभिनय।।

पात्रता तो मुझमें कहाँ है फिर भी अभिनय कर रहें हैं सोंच में तेरे मर रहे हैं।। देखने को उर में मेरे, उठ रही अभिलाष

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।। मनुज।।

प्रतिबिंब पर मत टिकें बिंब कुछ तो और है मनुज जग का सिरमौर है।। सिंधु के उद्दाम लहरों को, नाप डाला है मनुज हवाओं पे

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