पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

नईं आशाएं

होता है बहुत दुःख कभी कभी, विगत को सोचकर, हृदय भी रोता है बहुत , निष्ठुर नियति को नोचकर मन में आती कि कर लेता

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गज़ल

एक ताज़ा ग़ज़ल -यादों के आईनों में रह जाते हैं

यादों के आईनों में रह जाते हैं । जाने वाले आंखों में रह जाते हैं । ख़ुशबू बन कर उड़ते हैं फिर बाग़ों में ।

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दोहा

ग्यारह दोहें-तुम राधा मनभवनी , मैं तेरा घनश्याम

हमें सुनाती ज़िंदगी , तन्हाई का गीत । भरते-भरते उम्र की , गई गगरिया रीत । मेघों के संग आज फिर , उड़ी तुम्हारी याद

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कविता

जन्मदिन

ओसों की लड़ियों में सूरज खिला सुकून कुछ जीवन में जा के मिला मस्ती में तूं मुस्कराती रहे प्यारा जन्मदिन मनाती रहे।। हवाओं में सर्दी,

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कविता

परिवर्तन

जग में कुछ भी जो व्याप्त है, केवल वही नहीं पर्याप्त है । होगा उसमे कुछ तो बदलाव, चाहे हो जिसमें तुम्हारी  अरुचि या लगाव

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कविता

कभी देखा है?

कभी देखा है?दबे कुचले मैंले लोगों कोउनके होठों के हिलते कंपन कोउनके मन की लहर कोआंखों के सूखे आंसू कोहृदय की करुण पुकार कोहृदय में

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कविता

पहली कविता

एक मेरे मन ने ऐसी सोची, लिखूं एक कविता। कैसी होगी मेरी कृति, अकथनीय थी मनोवृति ।। पहली रचना लिखने बैठा, मन में उठी अनेक

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