पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

ख़त

कई लोगों के ख़त आए पर एक तेरा नहीं आया l शायद इस बार भी डाकिया मेरा घर नहीं पाया ll बड़ी उम्मीद से देखा

विस्तार से पढ़ें »
कविता

कुछ तो रोक रहा है

कुछ तो रोक रहा है मेरे दीवाने को, वरना कितना खाली है मैखाना उसे पिलाने को ll उसके पैरों में पड़ी हैं ज़माने की बेड़ियां,

विस्तार से पढ़ें »
कविता

वो मुस्कुरा देती है जब वो मुस्कुराता है

वो मुस्कुरा देती है जब वो मुस्कुराता है न जाने कौन सा रिस्ता वो निभाता है सुकूँ से बेख़ौफ़ सा रहता है जब उसका अहसास

विस्तार से पढ़ें »
कविता

युग का युवा

युग का युवा, अब धुंध, तम में खो रहा है , लक्ष्य साधे,आंख में सपने लिए सो रहा है l हर रोज़ हिम्मत की सड़क

विस्तार से पढ़ें »
कविता

जीवन मृत्यु के द्वंद युद्ध में

एक रात मैंने अंधियारे में, ख़ुद के अन्दर ख़ुद को देखा l थी लाश मेरी, मेरे अन्दर, थोड़ा मरते, जलते देखा ll निष्प्राण देह, गुमशुद

विस्तार से पढ़ें »
कविता

जलती रही मसाल

लकड़ी,उप्पल,रेवड़ी, लिए हुए ये लोहड़ी ll झूमें नाचें खुश हुयें l नुक्कड़ छप्पर झोपड़ी ll शरदी में गरमी लिए, जलती रही मसाल, दुल्ला भाटी की

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!