पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

उठव देश काय नौजवान (अवधी कविता)

उठव देश कय नौजवान अब किस्मत लेव अजमाय।करव काम विश्वास से अपन भाग्य लेव अजमाय।।काम धर्म हय काम हय पुजा सबसे काम महान।काम करय जो

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कविता

मैं रो रोकर

मैं रो रोकर  के थक गया हूँ मैं चल चलकर के थक गया हूँ। मैं तो बहता पानी था, तेरे दर पर आकर रुक गया

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कविता

जीवन तुम बिन

जीवन तुम बिन सूना- सूना है। संगीत तुम बिन फीका है। तुम प्रेरणा हो मेरे जीवन की, ठोकर खाकर सीखा है। मैं निर्मम हो गया

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कविता

गणतंत्र दिवस

कुछ जिम्मेदारियों की चादर ओढ़े , चलो गणतंत्र मनाते हैं ।दिल को कर इन्द्रधनुषी , चलो तिरंगा ध्वज फैराते हैं ।।भूल न जाएँ ताकत अपनी,

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कविता

रघुपति से जीत न पाऊंगा

मेघनाद उदास बहुत है,रघुपति से जीत न पाऊंगा, पिता वचन स्वीकार मुझे,लड़ते लड़ते मर जाऊंगा, इंद्र न मुझसे जीत सका,फिर तपस्वी कैसे जीत रहे, ये

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कविता

सन् 1857 महाक्रांति के योद्धा, हरियाणा के राजनायक राजा राव तुलाराम

धरा धरणि हिल गए निशाने गगन की ओट लगाए थे स्वतंत्रता के शूरवीर उस महायुद्ध में आए थे रखकर जान हथेली पर दुश्मन पर भृकुटि

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