पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

लिखा जो एक साथ नाम रेत पर

लिखा जो एक साथ नाम रेत पर।किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।तेरी गहरी सी इन आंखों में कोई गैर खूब नहाया होगाबता मेरे बिन इनमें

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कविता

पूजित सदा जगत में नारी

पूजित सदा जगत में नारीसृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारीचंद्रयान आकाश उड़ातीअपने साहस का परचम लहरातीशोभा इनकी सबसे न्यारीसृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारीइनका ना था इतिहास

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कविता

श्री गुरु वंदना

मैंने तनदाता से यह तन तो है पा लिया, संचालित करने को नवश्वास मुझे दीजिये॥ धन की चमक में ना चमकना मैं चाहता , ज्ञान

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गीत

एक बार धर कर

एक बार धर कर अधरन पर, मुरली सुधा लुटा दो। जीवन-भर की व्याकुल्ता को पल में आज मिटा दो। जीवन नैय्या मेरे कान्हैय्या मझधारों में

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कविता

खिदमत-ए- हिंद में

खिदमत-ए- हिंद में, जो गुज़र जायेंगे, नाम अपना शहीदों में कर जायेंगे। हमने प्यार भी तुमसे किया है मगर, याद रखना तुम्हें भी हम छल

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कविता

चलो कोई सिप सीखा जाय(अवधी कविता)

गुजर बसर से उप्पर उठी कय चलो कोई सिखा जाय।हाथेस अपने चलो आज अपन मुकद्दर लिखा जाय।।बुद्धि संघेंन विवेक मिला उप्पर से स्वस्थ्य देंही दिहीन

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