पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गीत

उठो देश के कर्णधार

मेरे देश के वीर जवानों, उठो देश के भावी कर्णधार।जिस माटी में जन्म लिया, रखना मां से नेह अपार।पढ़ लिख ज्ञानवीर बनो, यश कीर्ति वैभव

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कविता

हंस वाहिनी

हंस वाहिनी,मां सरस्वती,ज्ञान का भण्डार दे दो, शील वाणी में सदा हो,काव्य का संसार दे दो। प्रेम सबको दें सदा हम, प्रेम की आकांक्षा है,

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बसन्त/गणतंत्र

फिर बिरहिन मन में हूक उठीजब बाग़ में कोयल कूक उठीसरसों भी मन में फूल रहीवायु के संग में झूल रहीभौंरे भी गीत सुनाते हैंफूलों

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सरस्वती वंदना

पट खोले हैं माता मैं तेरे द्वार आई हूँ धन धान्य के नहीं मैं शब्द हार लाई हूँ अज्ञानी हूँ विमूढ़ हूँ माँ ज्ञान से

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गज़ल

देश की आन पे सर अपना कटा देते हैं

हम मुहब्बत में दिलो जान लुटा देते हैंइश्क़ करते हैं तो ता उम्र वफ़ा देते हैं देश के वास्ते जो ख़ुद को मिटा देते हैंउनके

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कविता

तिरंगा

भारत माँ की लाज बचानेजाने कितने वीर चले ।कमर लगाकर पिस्तौलों कोहांथो ले शमशीर चले ।।जलियाँवाला बाग हो चाहेहो अल्फ्रेड का पारक ।सभी जगहपर जान

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कविता

गणतंत्र दिवस

आज हम भारतवासी , गणतंत्र दिवस मना रहे हैं ।।बांट रहे खुशियां मिठाईयों के संग सभी ,झंडा फहरा कर सब ,राष्ट्रगीत गा रहे हैं ।आज

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कविता

आजादी

एक दिन गणतंत्र दिवस की चढ़ी खुमारी है, छुट्टी का दिन है बस यही बात इसकी प्यारी है, कितनों के दिल में धड़कता है देश

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कविता

सरस्वती मां

मां शारदे सदा तुम कृपा बनाए रखना ।बिना कृपा तुम्हारे है ज्ञान नहीं होता ,बिना कृपा तुम्हारे , कला,संगीत नहीं आता ।ज्ञान, विद्या और कला

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कविता

दीये से जलते हैं

दीये से जलते हैं खुद औरों को राह दिखाई है,तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।सही गलत बच्चों को समझाया है,हमने हमेशा एक

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