
भूल बैठे हैं
आज भूल बैठे हैं हम मूल्य इस दिन का। इसे लूटो उसे लूटो क्रम नित दिन का। राष्ट्र चिंतन हित में कोई लगता नहीं, श्वेत

आज भूल बैठे हैं हम मूल्य इस दिन का। इसे लूटो उसे लूटो क्रम नित दिन का। राष्ट्र चिंतन हित में कोई लगता नहीं, श्वेत

तेरे बिना इस जिंदगी में, रंग कोई आता नहीं है। छोड कर कभी फूल को, भौंरा कहीं जाता नहीं है॥ महफिल लोगों की बढ रही

घर का दीपक छीन हमें,माटी का ये घर देते हैं। न्याय हमसे दूरा है अब तक,अहसान हम पर धर देते हैं। घर का दीपक… नेताओं

अश्क छिपाकर हँस देते हैं। गम छिपाकर हँस देते हैं। प्यार करना उनसे सीखो हमको नित धोख देते हैं अंतिम क्षण है ये जीवन का

ऐसे गये वो गोकुल से गय्यों ने भी चरना छोड दिया। मग निहारती आँखों की पलकों ने भी झपकना छोड दिया। पावस आती है तुम

अगर एक दिन तुफान आयासभी लोग परेशान होंगेकोई बचायेगा खुद कोतो कोई अपनी गृहस्थी कोकुछ लोग तो भगवान का नाम लेंगेताकि टल जाए आया हुआ

इश्क का भ्रमण भीबहुत लम्बा हो गया हैअधिकतर लोगो कोगुम हो जाना ही होता हैअपनी मोहब्बत मेंकभी यह न जान पातेकी आगे और कितना जाना

कैसी है माया तिरी , कैसा है ये जाल । बदन गठरिया पाप की , प्राणों में सुकताल । या तो खुद प वार करे

आ गया मधुमास फिर से आ गया शाख पर कोपल उगी फिर सुनी पदचाप जब मधुमास की डाल मेहंदी कि कहीं शरमा गई है सुगंधित

स्त्री खड़ी सजी सँवरी सौम्य लगी,दिल मे उतरी तो वो उसका प्रेमी कहलाया फिर बढ़े आगे तो घर में वो राह निहारती मिली पत्नी कहलाई