पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

नया साल : कुछ कविताएँ

1.कुछ न कुछ बदलेगा जरूरक्यों कि बदल गया है मौसमदीवारों पर टंग गए हैं –हरे-भरे दृश्यों वाले नये कैलेण्डरकुछ और रंगीन हो गए हैंडालियों पर

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कविता

न जाने कौन हूँ मैं

अन्तर्द्वंदों के शिखर पर खड़ा सा मौन हूँ मैं। न जाने कौन हूँ मैं…… गहन तिमिरान्ध में प्रकाश हूँ मैं, छलकते आंसुओं की आस हूँ

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कविता

एक सुनहरी शाम

एक सुनहरी शाम का अँंचल आंखों में लहराता है यादों में भी तन्हाई में कोई मुझे बुलाता है एक तसव्वुर एक तिश्नगी एक दुआ है

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कविता

इजहार एक दिन

कमबख्त दिल से हो गये लाचार एक दिन। मैंने भी किया इश्क का इज़हार एक दिन।। एक खूबसूरत कली मेरे दिल को भा गई थी

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कविता

यह युग छलिया ,प्रपंचों का है

राजनीति के राज विशेषज्ञतुम्हें कोई काम नहीं आएगासावधान! खुद को तैयार रखोयह युग छलिया , प्रपंचो का है । इस युग में योग्यता का मोल

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