
आज नहीं, कल रोयेगा
समय के साथ बदल रहा सोच अब इज्जत नहीं पैसों पर जोर जो नकारता दुनिया समझती तेज नहीं भोंदू व्यंग्य से कहती जब सोच ही

समय के साथ बदल रहा सोच अब इज्जत नहीं पैसों पर जोर जो नकारता दुनिया समझती तेज नहीं भोंदू व्यंग्य से कहती जब सोच ही

हर हर महादेव शिवशंकर। विनती स्वीकारो अभ्यंकर।। आशुतोष अव्यय अविनाशी। दर्शन दो हवि, हे कैलाशी।। महाकाल शितिकंठ कपाली। बिल्वपत्र से शोभित थाली।। गंगाजल से स्नान

पदचिह्न बनाते बढ़ता चल, तू कालचक्र के पथ पर पूण्यकर्म तू करता चल, निःस्वार्थ भाव मन रखकर खींच लकीरें ऐसी प्यारे -2 देखता जग रह

समाज अब समाज नहीं रह गया है यह तो सजावट का एक बाजार बन गया है चारों ओर चकाचौंध का हथियार बन गया है रंगबिरंगे

एक ख़त पुराना मिल गया रंगीन ज़माना मिल गया एक शायरी आशिकी वो दीवानी-दीवाना मिल गया….. एक राह थी अनजान थे कोई मोड़ था कोई

वो जिसने छोड़ा खुद को टूटकर रब के सामने उसे रब सम्हालता ही है न तोड़ता सब के सामने बहस से कभी समस्या का समाधान

सम्हले जमाना जरा कयामत ढाने का इरादा लग रहा है खुद को बदलते दौर में आजमाने का वादा लग रहा है हुस्न तो हुस्न है

साथ कोई हो ये आरजू रही है हर एक की मिल गए और न बने कमी रही विवेक की इंतजार ने बढ़ाई है चाहतों की

मुसलसल युद्ध चलता है कोई घायल ज़ेहन में है । यूँ मैं ख़ामोश रहता हूँ मगर हलचल ज़ेहन में है । न तुम आईं कभी

प्रेम पास में बंधे हुए हैं न जाने कितने युगों से हम तुम मिले हैं लाखों ही हर जनम में सगे मगर हैं यहां पे