पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

इस यात्रा में

अँधेरे से आलोक की इस यात्रा में पार करना है एकाकी नदी,वन,पर्वत किसी राजर्षि की सनक पर सवार हो नहीं लेना मुझे स्वर्ग याद है

विस्तार से पढ़ें »

गीत

ताली बजा रहा है कोई कोई बैठ हाथ मलता है हर्ष-विषाद समन्वित जीवन ऐसे ही अबाध चलता है ! स्नेह-स्वांग सब हैं दिखलाते लाभ-लोभ के

विस्तार से पढ़ें »

ज़िन्दगी

बिक गये जो वस्तुओं की भाँति होकर चरण-चाकर रह गये जन के मन में,यश-गगन में आज हैं,कल भी रहेंगे आँधियों का वेग अपने वक्ष पर

विस्तार से पढ़ें »

हर तरफ बबूल !

माँगना न गीत अब गुलाब के ज़िंदगी की हर तरफ बबूल ! सुबह-शाम पेट का सवाल है बतिआयें प्यार, यार!किस तरह? पतझरी उदासी है रू-ब-रू

विस्तार से पढ़ें »

देखा है उन्हें

देखा है उन्हें उदास मैंनेहताश नहींथकते देखा हैटूटते नहीं बाढ़ बहा ले जाती हैख़ून-पसीने से उगायी फसलझुलसा देता है सूखाहरिआयी रबी जबदेखा है उन्हें गंभीर,ग़मगीन

विस्तार से पढ़ें »

संघर्ष मगर अपना है

सच हुआ नहीं सपनासच क्या होगासपना है! चाहा करना सच स्वप्नयही क्या कम है ?आहत,मर्माहत हुआनहीं कुछ ग़म हैकुन्दन बनने के लिएसदा कंचन कोतपना है

विस्तार से पढ़ें »

महाकवि गो० तुलसी दास की पावन स्मृति को समर्पित एक ग़ज़ल –

क्रान्ति-वेला की ललित ललकार है तुलसी शारदा की बीन की झंकार है तुलसी । शील में देवापगा की लहर की मानिन्द शक्ति में गर्जित जलधि

विस्तार से पढ़ें »

फ़कत बीज नहीं

बटोही जैसे जुगाता है गठरी चिड़िया अंडा जुगाती है जुगाये हमने बीज बोया-लगाया खेतों में कि लहलहायेगी फसल बालियाँ खनकेंगी खिलखिला उठेगा खलिहान फ़कत बीज

विस्तार से पढ़ें »

ज़िन्दगी का अर्थ

बुद्धि के दुर्गम किले में/ कैद भोली भावना है/ कंटकों की कचहरी में /फूल फरियादी बना है ! ज़िन्दगी का अर्थ — केवल अर्थ-संचय, त्याग

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!