
गुलाबी होली
हर रंग में तू ही तू हैवो कौन जगह जहां तू नहीं,भोर की लाली में तुमरंग हरा बन, हरियाली में तुम,चांद से चमकीलेतुम सूरज से

हर रंग में तू ही तू हैवो कौन जगह जहां तू नहीं,भोर की लाली में तुमरंग हरा बन, हरियाली में तुम,चांद से चमकीलेतुम सूरज से

बेरंग से रंग ढूंढने, बाज़ार में न जाएअपनों की प्रीतरंग, घुल मिल जाए,और होली की रौनक बढ़ाए… हर सुबह फिर गुलाबी होगीहर शाम फिर इन्द्रधनुष

वसंत आया, वसंत आया मच रहा चहुँ ओर शोर है आश्चर्यचकित हूँ मन की अवस्था को देखकर…. शांति में डूबा है या हो रहा आनंद

चहक रहा हो तन मन सारा,महक रहा हो उपवन सारा ,पतझड़ के जब छा जाये बादलबसंत ऋतु का हो उजियारा । कोयल कुहू – कुहू

कौन रंग फागुन रंगे, रंगे भऐं सब प्रीत, बसंत रंग सब रंग रखा, धरा हुई सब प्रीत । नीला अंबर रंग दिया, धरा हुई रंगीन

गोपियों संग कृष्ण ने रास रचाया, झूम झूम के “मधुमास” है ,आया। रंग गुलाल की उड़ रही फुहार, प्रकृति ने भी साथ निभाया। नई-नई कोपल,

इस बार की होली हर बार से नायब होगी, इस बार की होली हर बार से नायब होगी, हर रिश्ते में प्रेम के सतरंग पिरोयेगी,

होली आई रे होली आयी, रगों की बौछार लायी। मौसम ने ली अंगङाई,होली खुशियों की सौगात लायी।। शीत ऋतु ने ली है विदाई,ग्रीष्म की आहट

होली रंगों का त्यौहार, मिलकर सबको बांटे प्यार, चलो रंगों में हम रंग जाएं रसिया। चलने लगे जब-जब पूरवईया। झूमने लगे प्यारी फूलों की कलियाँ।।

तुम्हारे झूठे नैन अनुत्तरित प्रश्न प्रश्ननीय हल तेरी खुशबू इंद्रजाल सा जादू मन बेकाबू उलझे रिश्ते बेजोड़ विभाजन न घटा न गुणा ख्याली पुलाव जलता