
गज़ल-दिले नादान ये हलचल कहाँ से
मैने मतलब नहीं रखा जहाँ से। दिले नादान ये हलचल कहाँ से। मकान सूना सूना लग रहा है, कोई रुखसत हुआ रोकर यहाँ से।। पुराने

मैने मतलब नहीं रखा जहाँ से। दिले नादान ये हलचल कहाँ से। मकान सूना सूना लग रहा है, कोई रुखसत हुआ रोकर यहाँ से।। पुराने

बूढ़े बरगद के चबूतरे पर घनेरी छांव में। देखो फिर एक आज बंटवारा हुआ है गांव में।। कुछ नये सरपंच तो कुछ पुराने आये, कुछ

अक्सर मुझे आज़माने की खातिर। वो जलता रहा खुद जलाने की खातिर।। मुहब्बत में आये तो इक बात समझी, ये आंखें हैं आंसू बहाने की

नव वर्ष मंगलमय हो नव वर्ष में अति हर्ष हो आनन्दवृष्टिअपार हो। मेरे हृदय में आपका अनवरत साक्षात्कार हो।। नव वर्ष ० उपवन सुगंधित हो

धूप का पर्वत खड़ा है सामने । और लम्बा रास्ता है सामने । फिर कोई मासूम सी चाहत जगी । फिर भरम का सिलसिला है

कुछ पंक्तियां लिखने से भर आता है मन , कुछ पंक्तियां लिखने से मिलता है बहुत अमन ।। कुछ पंक्तियां लिखने से ऐसा होता है

ऐसा तो कुछ नहीं कि मर ही जाएं ख़ुशी से । औ ग़म भी गुज़रते नहीं हैं अपनी गली से । उस चाँद सी हँसी

मैं ही इस जग रचयिता हूं, मैं पालनकर्ता भी कहलाता हूं । मैं ही परमब्रह्म,परमेश्वर, कण कण में नजर मैं आता हूं ।। मैं धरा

न कोई उत्साह है, न कोई उल्लास है । शीत के आक्रमण से, तन मन सब बेहाल है ।। ये कैसा नया साल है ये

नये साल में मस्ती करते आया लल्ला हू-हल्ला – हू हल्ला।। नये – नये सब कपड़े पहने नारी लादे ऊपर गहने और किशोरियों के क्या