पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

कारवां

पल दो पल का कारवां पल दो पल का ज्ञानमयकदे मे चोर पुलिस सब है इक समानआता वाता कुछ नही दे रहे गीता ज्ञानइन्सानो ने

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कविता

ख्याब

आये ख्याब में मेरे,लिए मुँस्कान होठों पर अब न रहा अख्तियार मेरा, मेरे सासों पर मशहूर हो गया मै भी हुस्न की गलियों में मैैने

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गीत

देश का मान बढ़ाती हिंदी

गौरव गान सिखाती हिंदी, राष्ट्रप्रेम जगाती हिंदी। राष्ट्र धारा बन बहती, देश का मान बढ़ाती हिंदी। देश का सम्मान हिंदी, वंदे मातरम गान हिंदी। सबके

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कविता

खोया पाया

पुँछकर देखा खुद से क्या खोया क्या पाया हमने चंद चाँदी के सिक्के पाये है पर मुस्कान खोया हमने बेचकर शकुन दिल की शहर से

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कविता

सियासत

आईना सच कह गया जब राज दरबारो मे टुकडो टुकडो मे बट गया आज बाजारो मे राम के अस्तित्व को ही नकारने लगे है लोग

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कविता

इक सुर काश तुम्हारा होता

यह प्रेम अगर फिर अपना होता मैंने भाग्य सँवारा होता तुम मिलते फिर फिर से मुझको क्यो प्यार मेरा बञ्जारा होता कुछ भी मेरे पास

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कविता

मेरे चेहरे पर कई जिम्मेदारियों की हैं झुर्रियां

मेरे चेहरे पर कई जिम्मेदारियों की हैं झुर्रियां ,तुम कहते हो, कि मैं अब उम्र दराज हो गया llतुम देखो कभी सवेरे मेरे डूबते सूरज

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कविता

हो अगर मेरी तरफ

आँखों का होता इशारा गर कभी मेरी तरफचांद तारों का बदलता रूख सदा मेरी तरफलड़खड़ा गिरता कभी ना जिंदगी के मोड़ परतेरी बाहों का सहारा

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