
जीने की राह
ना हम होंगे ना तुम होगे नहीं कोई गिला होगासिमटती याद का ही बस यहां पर सिलसिला होगाचलो हंस कर बिता ले जिंदगी को जो

ना हम होंगे ना तुम होगे नहीं कोई गिला होगासिमटती याद का ही बस यहां पर सिलसिला होगाचलो हंस कर बिता ले जिंदगी को जो

जिस दिन जिंदगी की शाम हो जाएगीसब रोते ही रहेंगे कहीं खुशी ना नजर आएगीलगेगा सूना सूना सा ए सारा जमानाबहार की रुत भी खिजा

देखा मैंने सागर को जब तेरे इन दो नैनो मेंभाव मेरा तो भावुक होकर डूब गया तेरे नैनो मेसागर में क्या गहराई होगी जितना तेरे

धन दौलत का अहंकार पथभ्रष्ट तुझे कर जाएगाखून पसीने की मेहनत जब लूट किसी का जाएगाखून पसीने की दौलत को हडप अगर तुम जाओगेछीन कमाई

सच को जब हमने समझा तब झूठा भी हमने समझादेख पराए धन को मैंने कभी नहीं अपना समझाजिसको जैसा देखा मैंने उसको मैंने वैसा समझादिमाग

याद करो वह मां का आंचल पलते थे जिस आंचल मेंजब जब संकट आ जाता था बच जाता था आंचल मेंबचपन में जीवन दिखता था

पालते लाड प्यार से, ममता दुलार से।खुशियों बहार से, मीठी पुचकार से।रखे औलाद को, दुनिया में मां बाप।आंखों का तारा हमे, दिलों के तार से।

तारीफ में ताकत होती तारीफें खुलकर करते हैंमंजिलें मिलती उनको जो तूफानों में चलते हैं अटल इरादा ठानकर सफल इंसान होता हैठोकरें खाकर ही मंजिलों

मेरे दर्द में तुम,जितनी वाह वाही ढूंढोगे lमेरे अन्दर के गुमशुद में,जितना इश्क़ खोजोगे lमैं दर्द को,और विस्तारित कर,समुद्र होता जाऊँगा llमैं इश्क़ को ओढ़,अनंत

मैं सोचता हूँ सिद्धार्थ ने,शहर घूमनें की इच्छा क्यों की होगी?कैसे उनका मन ग्रंथों को पढ़ते समय,मन को गढ़ते समय ,जीवन के पौधे को मुरझाते