
जीवन तुझपर वार दूँ
विटप बन मैं तुझे , सुख भरी आस दूँ। आ तुझे अपनी कोमल कोमल, डालियों से बाहों के हार दूँ। अपने सारे पत्तो से सारा

विटप बन मैं तुझे , सुख भरी आस दूँ। आ तुझे अपनी कोमल कोमल, डालियों से बाहों के हार दूँ। अपने सारे पत्तो से सारा

चिराग आंधियों में अब जलाएगा कौन?, गिरते हुए लोगों को अब उठाएगा कौन?, सब लोग अपनी अपनी राह चल दिए, भटके हुए लोगों को राह

भरे सम्मान गरिमा से,हिर्दय गंगा सा पावन थानिराले जगत से, दिल में, परम प्रिय प्रेम पलता थासदा ओठो पे धर मुस्कान, हृदय को जीत लेते

हमने तो उसे निहारा रात दिनजिंदगी में कभी जो मिल ना सकामिल गया था जिंदगी में जो मुझेपाके उसको कभी खुश हो ना सकाजिंदगी भर

कुछ कहना है बहुत अरसे से बेताब हैं दिल कोई लफ्ज़ नहीं जो हिम्मतवर बनकर अपनी बात कह दे कोई संकेत नहीं जो नित्य मन

तमसो मा ज्योतिर्गमय तम से प्रकाश की और ले जाने की अभ्यर्थना । प्रकाश नैराश्य के विरुद्ध प्रबल उत्साह का संघोष है । मन का

लाए उद्धव एक चिट्ठी श्री कृष्ण की, गोपियों को लगा पत्रिका है प्रेम की । खोजने लगीं नाम उसमें अपना – अपना , सत्य जानकर

प्यास जग की है बहुत कितना पियो बुझती नहींजो लगी है दिल में सबके आग वह बुझती नहींप्यास है जग को सुरा की मेघ से

चिंता मत कर असफलता की मत पछताओ जीवन मेंजीवित रहना व्यर्थ है जब संघर्ष न हो इस जीवन मेंजीवन है दो दिन का मेला हंस

ना हम होंगे ना तुम होगे नहीं कोई गिला होगासिमटती याद का ही बस यहां पर सिलसिला होगाचलो हंस कर बिता ले जिंदगी को जो