पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

स्नेहनिल बौछार

आपके स्नेह की शीतलता से मन मानो शांत था आपका आलिंगन छुवन तपिश खत्म करता था यादों की उष्णता से आज मन विचलित होता हैं

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कविता

मैं नहीं मानता

देखो ‘ मैं नहीं मानता पत्थरों में बसे भगवान को सुना है तुम रोज जाती हो माथा टेकने मैं तो यही कहूंगा अगर वहां ईश्वर

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कविता

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता:प्रणता:स्म ताम् ॥” हे माँ! तुम्हारे दर पे आए ज्ञान का वरदान दो।। कर दो सारे

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