बेदर्दों को दर्द सुना कर,क्या होगा
बेदर्दों को दर्द सुना कर,क्या होगा बहरों की महफ़िल में गा कर क्या होगा ! आस्तीन में जिसने पाला साँप यहाँ कहिए उस से हाथ
बेदर्दों को दर्द सुना कर,क्या होगा बहरों की महफ़िल में गा कर क्या होगा ! आस्तीन में जिसने पाला साँप यहाँ कहिए उस से हाथ
बाज़ारी आँधी में जीवन-मूल्य हुए तिनके ! बाहर- बाहर चमक-दमक भीतर गहराता तम दीमकज़दा चौखटों पर लटके परदे चमचम संवेदन-स्वर क्षीण-क्षीणतर खनक रहे सिक्के !
हवा के शोर में संगीत सुनना छोड़ दूँ क्या ? जख्म है दिल में, तो जीना छोड़ दूँ क्या ? बेवफ़ाई तेरा फन , जो
किताब में फूल की सूखी पंखुड़ी मिली है। रास्ता मिलता रहा पर मंज़िले ,ना मिली है। तुम्हारे दरों दीवार को पहचानता हूं, तेरे चेहरे की
विरान हुआ जंगल , तब बरसात आई है।जनाजा बनगया जिस्म, तब दवा आई है।तपन में ढूंढता तुझको रहा बगीचे;बागों में-लगी जब आग मेरे घर,तब हवा
मैं कहीं पर रूक न पाया! एक हृदय ले इस जगत में, पथ पे अपना पग बढ़ाया। राह में छाया सघन थी, पंछी ने आवाज
चांद निकला गगन में, हंसी चांदनी, तो मगन हो के धरती क्या हंसने लगी? माना हंसते हो कुछ पादप लता- संग बेला, चमेली, रातरानी भले,
चित्र संजोए बचपन के, यौवन का कुछ उद्गार लिए, घुम रहा डगर शहर में- यादों का एक संसार लिए। बिजली -बत्ती रह-रह कर, बीच सड़क
शोणित था माँ का दूध नहीं था तुम्हें गर्भ में जो थी पिलाती लाने को दुनिया में तुमको सहा था माँ ने दर्द अपरिमित आये