
एकता और सद्भाव की टोली- होली
पलट के ना देखूँगी जो मुझे मिला नहीं, इस होली कोई शिकवा कोई गिला नहीं। छांछ और भांग का छायेगा जो खुमार, हंसी से लोट

पलट के ना देखूँगी जो मुझे मिला नहीं, इस होली कोई शिकवा कोई गिला नहीं। छांछ और भांग का छायेगा जो खुमार, हंसी से लोट

नीले पीले लाल गुलाबी, गोरी रंग लेकर आई। फागुन आयो रंग रंगीलो, उर उमंग मस्ती छाई। रसिया नाचे ढप बजावे, आज बिरज में होली है।

होली आई विहसा अंबर प्रकृति हुई सुहानी । सात रंग से भीगी धरती ओढ़ी चूनर धानी ।। बसंती बयार बह रही तन में सिहरन लाई

रंग दे पिया मोहे रंग दे गुलाल। भर पिचकारी रंग डारे है लाल। फागुनी मौसम फिजाएं खिली। मदमस्त मस्तानी हवाएं चली। लबों पे तराने दिल

रंग दे पिया मोहे रंग दे पिया भर पिचकारी रंग खेले पिया फागुनी मौसम फिजाएं खिली मदमस्त मस्तानी हवाएं चली लबों पे तराने दिल खिलने

मीठे पानी सेभरी हुई यह धरतीफागुन की धूप मेंतपने लगीवसंत की हवाजंगलों में दौड़तीनदी के किनारेआयीयहां बाग बगीचों मेंपेड़ों से पीले पत्तेझड़ने लगेडालियों परनये पत्ते

हल्द्वानी सेपहाड़ों पर लंबी चढ़ाईअल्मोड़ा केआसपास से गुजरतेनैनीताल जाने वालीरोड के मोड़ पर रुककरचाय पीतेयात्रियों से बागेश्वर केबारे मेंबातचीत करतेहम शाम तकजंगलों से बाहरपिथौरागढ़ चले

होली आई होली आई ,रंगों की बहार है लाई।होली आई होली आई ।।रंग – बिरंगे गुलालों के संग,मिलकर हम सब हमजोली ।स्नेह और सौहार्द के

होश में रहियेगा दुनिया लूटने को हमेशा से तैयार है वो जिसे अपना समझते हो उसके लिए तो व्यापार है एक दौलत है जिंदगी गर

जा रहा हूं तेरे शहर को अलविदा कहकर और न रह पाएंगे तेरे शहर में हम खफा होकर जा रहा हूँ तेरे सहर को अलविदा