
रंग इन्द्रधनुष
धरती का हरापन सदा से बुलाते रहे मुझेमैं उसके आँचल में दूब बनकर पसर गया ,नीला विस्तृत आकाश हुर्र बुलाता रहा मुझेमैं उसमें घुसकर नीलकंठ

धरती का हरापन सदा से बुलाते रहे मुझेमैं उसके आँचल में दूब बनकर पसर गया ,नीला विस्तृत आकाश हुर्र बुलाता रहा मुझेमैं उसमें घुसकर नीलकंठ

मेरे प्रियतम को ना जगाओ, सुमन सेज पर हीं रहने दो । अब तक तो ये जाग रहे थे, अब जी भर कर सो लेने

अटल बिहारी वाजपेई जी ने, वो किया जो कोई न कर पाया था । परमाणु परीक्षण करवा करके, सारी दुनियां को चौंकाया था ।। भारत

सुनते हैंकथाओं में कभी स्वर्ण युग थेजब चेतनाओं परकोहरा न छाया था गुनाह काजमीन ज्यादा औरलोग कम थेखुला आकाश बेफिक्र होकर देख सकते थेकोई भी

आज फिर अपने गांव जा रहा हूँ वही पीपल, सिमल और बरगद के छाँव जा रहा हूँ आज फिर अपने गाँव जा रहा हूँ फिर

ये सेंटा क्लॉज साल में, सिर्फ एक बार ही आता है, एक सेंटा मेरे घर में है,जो हरपल खुशियां लुटाता है । मेरी आंख के

मेरी सांसों में तुम,बस जाओ ज़रा जिंदगी ये मेरी महक जाएगी। रात ख्वाबों में,आया करो रोज़ तुम शान से मेरी रातें गुजर जाएंगी। चंद पल

पुष्प पत्र सम मुस्काती है, दिल को वो बहलाती है। प्रेम कवि हूं मैं, प्रेम मुझे सिखलाती है।। जहां भी जाए,अदा दिखाए अदा दिखा के

सबसे पहले जगती है , बाद में सबसे सोती है। मां ऐसी ही होती है हां मां ऐसी ही होती है। परिवार सदा खुशहाल रहे

जइसन फोन बजा राती मा, हम आंखी मिजआवै लागे। नाम तोहार देखतै मान, इयरफोन हम ढूढ़ै लागे।। बिस्तर तौ छोड़ा, बिस्तर के नीचे आय गये।