
नये साल में मस्ती
नये साल में मस्ती करते आया लल्ला हू-हल्ला – हू हल्ला।। नये – नये सब कपड़े पहने नारी लादे ऊपर गहने और किशोरियों के क्या

नये साल में मस्ती करते आया लल्ला हू-हल्ला – हू हल्ला।। नये – नये सब कपड़े पहने नारी लादे ऊपर गहने और किशोरियों के क्या

होता है बहुत दुःख कभी कभी, विगत को सोचकर, हृदय भी रोता है बहुत , निष्ठुर नियति को नोचकर मन में आती कि कर लेता

सब जन उसके अपने हैं,वो मदन गोपाल सबके हैं, एक हाथ में मुरली अपने,दूजे में सुदर्शन रखते हैं ।। माखन को कभी चुराते हैं,गिरवर को

ओसों की लड़ियों में सूरज खिला सुकून कुछ जीवन में जा के मिला मस्ती में तूं मुस्कराती रहे प्यारा जन्मदिन मनाती रहे।। हवाओं में सर्दी,

जग में कुछ भी जो व्याप्त है, केवल वही नहीं पर्याप्त है । होगा उसमे कुछ तो बदलाव, चाहे हो जिसमें तुम्हारी अरुचि या लगाव

कभी देखा है?दबे कुचले मैंले लोगों कोउनके होठों के हिलते कंपन कोउनके मन की लहर कोआंखों के सूखे आंसू कोहृदय की करुण पुकार कोहृदय में

बीतते हुए साल ने मुझसे रोते हुए ये कहाथक गया हूं ,टूट गया हूं, रूठ गया हूं अपनों सेमुझे अब जाने दोपाखंडों से भरा हुआ

एक मेरे मन ने ऐसी सोची, लिखूं एक कविता। कैसी होगी मेरी कृति, अकथनीय थी मनोवृति ।। पहली रचना लिखने बैठा, मन में उठी अनेक

आओ हम अभिनंदन करते उड़ रहे गुलाल का आ रहे नये साल का।। भ्रमर गुनगुनाते, खिलती हैं कलियाँ महँ – महँ महँकते, चौराहे औ गलियां।

क्या कभी आपने उसकी भावना को समझा जब आपके हाथ बढ़ते हैं डाली की तरफ कलियां चुनने के लिए डाली कंपन करती है डरती है