कविता

Category: कविता

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भगवान बन जाना

कितना आसान सा है इन्सान बन जाना,बेवजह क्यों चाहते हो भगवान बन जाना llबस थोड़ा ढालना है खुद में इंसानियत के गुणफिर तुम स्वतः देखना

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बाल दिवस

कुछ नन्हें दीपक सूरज को रस्ता दिखलाते हैं,कुछ जुगनू अपनी मेहनत से आलोकित हो जाते हैंकुछ हाथों की कलम कभी भी लिखती नहीं धरा पर,कुछ

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सत्य

जिंदगी से जल्द जो हार मान जाते है सुख की दहलीज़ से वो पीछे छूट जाते है। रेत में मिल जाती तब उनकी खुशियाँ उठ

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ज्ञान

ज्ञान जहाँ से मिले छोड़ना मत स्वयं को इस राह पर कभी रोकना मत यू चौंकते क्यों हो बात सही है किताब और दुनिया देती

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अपनों से

निज अपनों से पिस रहे,हम तो अब हर रोज, प्रेम यहां मिलता नहीं,लाखों कर लें खोज। लाखों कर लें खोज, न कोई प्रेम निभाता भाई

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