
भगवान बन जाना
कितना आसान सा है इन्सान बन जाना,बेवजह क्यों चाहते हो भगवान बन जाना llबस थोड़ा ढालना है खुद में इंसानियत के गुणफिर तुम स्वतः देखना

कितना आसान सा है इन्सान बन जाना,बेवजह क्यों चाहते हो भगवान बन जाना llबस थोड़ा ढालना है खुद में इंसानियत के गुणफिर तुम स्वतः देखना

कुछ नन्हें दीपक सूरज को रस्ता दिखलाते हैं,कुछ जुगनू अपनी मेहनत से आलोकित हो जाते हैंकुछ हाथों की कलम कभी भी लिखती नहीं धरा पर,कुछ

कैकई तुम उदास मत होना, तुमने अपना कर्तव्य निभाया था । विधि ने लिखा वनवास राम का, तुमने अपयश कहां कमाया था ।। राम यदि

जिंदगी से जल्द जो हार मान जाते है सुख की दहलीज़ से वो पीछे छूट जाते है। रेत में मिल जाती तब उनकी खुशियाँ उठ

वो एक कप कॉफी , कितना सुकून देती है ! रिश्तों में लाती है मिठास , दूर हुए लोगो को करती है पास , परिवार

ज्ञान जहाँ से मिले छोड़ना मत स्वयं को इस राह पर कभी रोकना मत यू चौंकते क्यों हो बात सही है किताब और दुनिया देती

निज अपनों से पिस रहे,हम तो अब हर रोज, प्रेम यहां मिलता नहीं,लाखों कर लें खोज। लाखों कर लें खोज, न कोई प्रेम निभाता भाई

अमृत की है सबको लालसा, विष को भला पिएगा कौन ? प्रकाश की है सबको जरूरत, दिनकर सा मगर तपेगा कौन ।। अंधकार ने मारी

अच्छे से कट जाता है समय कविता पढ़ने – लिखने से , मन को मिलता है बहुत सुकून कविता पढ़ने – लिखने से , शब्द