कविता

Category: कविता

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वंदन

उगते सुरज का वंदन है दुबते का भी वंदन है खुशीयों से सजा रहे हे नूतन वर्ष अभिनंदन है नया साल आया है हम नई

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बेटियां

बेटियां किसी से कम नहीं है इस जहान में वायुवान रेल तक चलाया है भारत महान में बेटियां अपने दम पर जँहा को जीत आई

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कविता

तेरे शहर में गरीब के अस्मत भी बिके हैं

मुझसे मिले हैं जो भी वो लुटने वाले मिले हैं खुदा शहर मे तेरे बहुत सारे शिकवे गिले हैं खुदा दर पर तेरे पंडित मुल्ला

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पुष्प संदेश

विखराता सौरभ सुगंध मैं जोर – शोर से खिला हुआ। काँटों से भी मिला हुआ।। अभिलाषा मेरी यह है, सबको सुख दे जाने को शांति

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कविता

ऐसा कुछ हो पाता

इस हाड़ कँपाती ठंडक में यदि ऐसा कुछ हो पाता। उच्छ्वासों से साँस मिले तो सारा ठंडक खो जाता।। गर्माहट तन की पा करके थोड़ा

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पानी – पानी

चहुंओर दिख रहा पानी – पानी कीचड़ से गीली चूनर धानी। बच्चे कागज की नौका दौड़ाये हाल नदी की वही पुरानी।। खतरों से वह खेल

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मेरी हिन्दी

शब्द है कितना प्यारा हिंदीदेश है हिन्द भाषा मेरी हिंदीलेखन मेरी हिंदी पाठन मेरी हिंदीकहे कवि रहन सहन चलन मेरी हिंदी कहे हिंदी यहाँ जब

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