
धन दौलत का अहंकार
धन दौलत का अहंकार पथभ्रष्ट तुझे कर जाएगाखून पसीने की मेहनत जब लूट किसी का जाएगाखून पसीने की दौलत को हडप अगर तुम जाओगेछीन कमाई

धन दौलत का अहंकार पथभ्रष्ट तुझे कर जाएगाखून पसीने की मेहनत जब लूट किसी का जाएगाखून पसीने की दौलत को हडप अगर तुम जाओगेछीन कमाई

सच को जब हमने समझा तब झूठा भी हमने समझादेख पराए धन को मैंने कभी नहीं अपना समझाजिसको जैसा देखा मैंने उसको मैंने वैसा समझादिमाग

याद करो वह मां का आंचल पलते थे जिस आंचल मेंजब जब संकट आ जाता था बच जाता था आंचल मेंबचपन में जीवन दिखता था

तारीफ में ताकत होती तारीफें खुलकर करते हैंमंजिलें मिलती उनको जो तूफानों में चलते हैं अटल इरादा ठानकर सफल इंसान होता हैठोकरें खाकर ही मंजिलों

मेरे दर्द में तुम,जितनी वाह वाही ढूंढोगे lमेरे अन्दर के गुमशुद में,जितना इश्क़ खोजोगे lमैं दर्द को,और विस्तारित कर,समुद्र होता जाऊँगा llमैं इश्क़ को ओढ़,अनंत

मैं सोचता हूँ सिद्धार्थ ने,शहर घूमनें की इच्छा क्यों की होगी?कैसे उनका मन ग्रंथों को पढ़ते समय,मन को गढ़ते समय ,जीवन के पौधे को मुरझाते

तमन्नाएंहसरतें आरजुओं काकोई अंत नहींसंसारी,वीतरागीइससे अछूता कोई सन्त नहींएक के बाद एकनित नई अनेककामनाओं की कतार हैइस मामले में कोईकिनारें नहींसबके सब मझधार हैएक भी

रेगिस्तान की भूमि पर सोच रही थीं मैं दूर दूर तक कोई रहने वाला नही था वहाँ पर्यटक आते व लौट जाते आखिर.. क्यों..? क्या

देखो ना क्या से क्या हो गया दोनों का अलग रास्ता हो गया सादगी को छोड़ दिया लोगों ने आधुनिक यहां हर जवां हो गया

समय ने खोले बंद पुराने अनुभूति का गहरा सागर तृष्णा चुगता एक पपीहा सुधि से शीतल कई जमाने समय ने खोले बंद पुराने प्रथम