कविता

Category: कविता

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बिहारी हैं

माँ मैथिली गुरु, ख़गेश्वर नाथ,वाली जुबानी है,कोरे, काग़ज़, पे लिख लो,शाँति यही बस आनी है,विश्वविद्यालय बिहार, नालंदा,खुली कहानी है। धीश देखें, जग धीश देखें,पीने न

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ट्विन टावर यदि बोल पाता तो कहता

ट्विन टावर यदि बोल पाता तो कहता-पलक झपकते ही मुझे जमींदोज करने वालों,कल तुम भी शामिल थे मुझे बनाने में।मुझे ये तो नहीं पता कि

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ईमानदारी एक साधना है

ईमानदार होने के मतलब अप्रयास अज्ञात हजार शत्रु उत्पन्न करना। ईमानदार होने का अर्थ अपने परिश्रम और ईश्वर के न्याय पर पूर्ण विश्वास रखना। ईमानदार

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भले हमारी हार हो

ये जीत का जश्न जलता रहे भले हमारी हार हो सिर्फ हमीं से प्यार हो।। जल रहे हैं लोग यहाँ, देख तेरी स्वच्छंदता को रोक

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एकाकार

मन शांत लिए ही स्थिर सी आज बैठ गई थी मानों एकाग्रता में सोच पाऊँगी अपने को व अपने भविष्य को झांक पाऊँगी स्वयं में,

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गुरुदेव को विनम्र श्रद्धांजलि

भरे सम्मान गरिमा से,हिर्दय गंगा सा पावन थानिराले जगत से, दिल में, परम प्रिय प्रेम पलता थासदा ओठो पे धर मुस्कान, हृदय को जीत लेते

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