कविता

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आपका आँचल

कुछ इस कदर छाया है आँचल आपका मुझपर जिधर देखता हूँ आलम्ब आपका पाता हूँ। राहें जिन्दगानी में तुफानों से भरी जवानी में, जब कभी

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गुरु का व्यक्तित्व

सूर्य, चन्द्र और सितारें जिनके मुख मण्डल को आलोकित किया करते हैं। जिन्हें सत्कर्म करने को उनके सात्विक विचार आन्दोलित किया करते हैं। जिनके आँचल

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मेरी प्रेमिका

मेरी प्रेमिका पुष्प की मुस्कान वो हैं। परिंदों के पैरों की उडान वो हैं। जिसको जीवन भर जीया मैंने , पाऊँगा जिसको अरमान वो है।

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तेरे आँचल का

बस एक ही तमन्ना दिल में प्यार मिले तेरे आँचल का कुछ यूँ छिप जाऊँ कि पता न चले तेरे आँचल का नशीली आँखे तेरी

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पुत्री

गुलाब की कली के समान उत्पन्न होती है पुत्री और खिले फूल की भाँति महकती है पुत्री उपवन में सभी को आकर्षित करती है पुत्री

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 भूल बैठे हैं

आज भूल बैठे हैं हम मूल्य इस दिन का। इसे लूटो उसे लूटो क्रम नित दिन का। राष्ट्र चिंतन हित में कोई लगता नहीं, श्वेत

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