
क्या करूँ कैसे बताऊँ
क्या करूँ कैसे बताऊँ जन्म-जन्म की कथाएँ जो समय की कर्मनाशा में अकारण मिल गई जन्म लेता लुप्त होता धार में जल बिंदु सा फिर

क्या करूँ कैसे बताऊँ जन्म-जन्म की कथाएँ जो समय की कर्मनाशा में अकारण मिल गई जन्म लेता लुप्त होता धार में जल बिंदु सा फिर

एक सुनहरी शाम का अँंचल आंखों में लहराता है यादों में भी तन्हाई में कोई मुझे बुलाता है एक तसव्वुर एक तिश्नगी एक दुआ है

कमबख्त दिल से हो गये लाचार एक दिन। मैंने भी किया इश्क का इज़हार एक दिन।। एक खूबसूरत कली मेरे दिल को भा गई थी

राजनीति के राज विशेषज्ञतुम्हें कोई काम नहीं आएगासावधान! खुद को तैयार रखोयह युग छलिया , प्रपंचो का है । इस युग में योग्यता का मोल

कोई लीला करो शंभू बड़ा घनघोर संकट है धरा पे आप ही शंकर सदा उपकार करते हो कहीं भक्ति से भक्तों का न अब विश्वास

तावा मूंदा तव बहुत गवा बखरी अस आज उजार परी दमदार परोसी नाय भये अपनै कमजोर देवार परी अस रहा परानिम् मेल जोल कहियौ न

जिसने जीवन को संवारा है मेरेवो ही जीवन का मेरे हकदार होगम में भी मैं मुस्कुरा कर के जियूऐसा ही मेरा यहां किरदार होकर्म से

जो देखा एक गुलाब तो दिल ये मचल गयाकांटा नहीं था फिर भी वो सीने मे चुभ गयाकहते हैं लोग पंखुड़ी कोमल गुलाब कीपर छुआ

जो राह तेरे ही दर पे जाए उसी पे हरदम कदम रखूंगासदा ही जीवन बना के निर्मल पुष्प कमल सा खिला करूगाकभी चुभूगा न शूल

त्याग प्रेम दिल भरा तो सब ही अपने हो गएचल के कर्म पथ पे हम इतिहास अपना गढ गयेहौसले बढ़ाके अपने हम शिखर पे चढ़