
गोपियों की निराशा
मिलता होगा छप्पन भोग खाने को मधुर वहांमाखन चुराने यहा क्यू अब आएगेसोने का मुकुट होगा अब तो उनके सिर परमोर का मुकुट सिर पे

मिलता होगा छप्पन भोग खाने को मधुर वहांमाखन चुराने यहा क्यू अब आएगेसोने का मुकुट होगा अब तो उनके सिर परमोर का मुकुट सिर पे

आओ रंग जाए एक ही रंग मेंप्रेम –प्रिया के संग मेंआओ स्वर्ग सा खिल जाएं हमफागुन की खुशी उमंग में । आज न हो शिकायत

होली रंग भरी जो आई सबके दिल में प्यार जगाईशिकवा गिला को दूर भगा कर सबको गले मिलाने आईदेखो फिर से होली आईप्रेम रंग में

रंग के संग भंग और हाथ में गुलाल होझूम रही सबके मन में फागुनी बयार होखेलते गुलाल सब ही गाते एक राग होटोलियों के पीछे

आज अपने गले से लगा लो मुझेदेखिए रुत तो अब फागुनी आ गईमेघ की आज बारिश भले कम हुईरंग मे घुलती बारिश तो फिर आ

पर्व है रंगों का मन को भी रंग लीजियेहोलिका भस्म हुई प्रहलाद को संग लीजिएभक्ति की शक्ति को सदा नमन रंग दीजिएनास्तिकता बदरंग है इसका

रंग अनेकों होते तो हैँआँचल हर एक भिगोते तो हैँ कंही रंग प्रीत काकंही रंग रीत काकंही रंग मनमीत कादिखाई दे जाएदिल के झारोके जो

लेखक और उसकी लेखनीस्वतंत्र हो आजाद हो तो है घनी मुग़ल आये तो हिन्दुओं ने कमियां ज्यादा देखि या खूlबीयांसोचती तो होंगीलेखक और उसकी लेखनी

फागुन में मन बौरायामनवा बहुत ललचायावातावरण बना सुखमय सौंदर्य काखुशबू फूलों को भाया । फागुन के रंग में हम भी ढलेंराधा कृष्ण के संग चलेंखूब

होली इन्द्रधनुष जैसी चुनना कुछ रंग तुम उससे चुरा लेना एक रंग तुम मेहंदी का लेना रचा देना उन हथेलियों पर जिसका पति अभी अभी