
मंजिलें
बना लो राह खुद अपनी, मंजिलें दिख हीं जाएगी । यदि दृढ़ हो इच्छाशक्ति, मुश्किलें मिट हीं जाएगी ।। भले हीं लाख ओले अड़े होंगे,

बना लो राह खुद अपनी, मंजिलें दिख हीं जाएगी । यदि दृढ़ हो इच्छाशक्ति, मुश्किलें मिट हीं जाएगी ।। भले हीं लाख ओले अड़े होंगे,

जाग जाग रे ज्ञानी मानव, ज्ञान का दीप जला लेना। चकाचौंध की इस आंधी में, मानवता को ना खा जाना।। सोच जरा क्या पाया है

इश्क़ में ज़िन्दगी फ़ना होगी कारगर अब मेरी दुआ होगी आज फिर दिल मेरा ये टूटा है उसने ग़ैरों से की वफ़ा होगी पास उसके

तुम मेरे ख़्वाबों में आना छोड़ दो इश्क़ मेरा आज़माना छोड़ दो मैं बुलाऊं जब तुम्हें आया करो करना मुझसे अब बहाना छोड़ दो ‘मन्तशा’

तुम्हारा जब से सजदा कर लिया है ये अपना वक्त अच्छा कर लिया हैं तुम्हारे नाम की मालाएं जप कर अजब दिल ने तमाशा कर

होके तुझसे जुदा दूर जाना नहीं दिल का तेरे सिवा कुछ ठिकाना नहीं । रोज़ आओगे तुम मुझसे मिलने सनम मैं सुनूंगी कोई भी बहाना

ऐलान करो अब लाल किले से,चढ दुश्मन की छाती पर।नहीं चलेगा मुल्क हमारा, देशद्रोहियों की थाती पर।दुश्मन देश के हित में जिसकी उमड़ रही हो

दर्द मुझको यहां मिला है बहुत। जिंदगी ही तो इक सजा है बहुत। दिल लगाने की ज़िद करे न कोई, घाव मेरा अभी हरा है

दुनिया को हाल ही नहीं हुलिया भी चाहिए। जन्नत के साथ में हमें दुनिया भी चाहिए। तन कर खड़ा रहा जो कहीं पर मिला नहीं,

लगता है अब दहशत कम है। या योगी को फुर्सत कम है। बच्चों को ही आगे कर दो, हाथों में अब पत्थर कम है। बाज