
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी
पंडितजी मदन मोहन ने, अंग्रेजी सत्ता को हिलाया था, सत्यमेव जयते का नारा, सारे विश्व में छाया था ।। सत्य त्याग और देशभक्ति का, अनूठा

पंडितजी मदन मोहन ने, अंग्रेजी सत्ता को हिलाया था, सत्यमेव जयते का नारा, सारे विश्व में छाया था ।। सत्य त्याग और देशभक्ति का, अनूठा

अटल बिहारी वाजपेई जी ने, वो किया जो कोई न कर पाया था । परमाणु परीक्षण करवा करके, सारी दुनियां को चौंकाया था ।। भारत

सुनते हैंकथाओं में कभी स्वर्ण युग थेजब चेतनाओं परकोहरा न छाया था गुनाह काजमीन ज्यादा औरलोग कम थेखुला आकाश बेफिक्र होकर देख सकते थेकोई भी

बस एक चेहरा थाबेशक रूपहरा थाकोई खास किरदार नहींचेहरा भ्रांत,क्लांत,अशांतकिसी परिभाषा में नहींचेहरा जिस परसंवेदना का रेखांकन नहींएक छवि भर हैचेहरे का कोई चरित्र नहींचेहरा

वो वक्त जबएक दीर्घ यात्राके बादनिस्तब्ध दिशा पश्चिम मेंअस्ताचल की औरजाते सूरज कीशफक भाव विभोर करती हैंआँख से आत्मा तकएक वन्दनीय छवि उकरआती हैंसौम्यता से

वक़्त ए रुख़सत ये सिलसिला होगा, तुझसे दिल खोल कर गिला होगा बेवफ़ा हो गया है शायद वो, मुझसे बेहतर कोई मिला होगा, एक मानूस

आज फिर अपने गांव जा रहा हूँ वही पीपल, सिमल और बरगद के छाँव जा रहा हूँ आज फिर अपने गाँव जा रहा हूँ फिर

ये सेंटा क्लॉज साल में, सिर्फ एक बार ही आता है, एक सेंटा मेरे घर में है,जो हरपल खुशियां लुटाता है । मेरी आंख के

नज़ारा और कोई किस तरह दिखाए नज़र, तेरे सिवा कोई मौजूद हो तो आए नज़र। वो जिसको देख के अल्लाह याद आता हो, उस एक

नजरें मिलाने को बेताब थे गर मिले तो ये क्या हो गया ख्वाब – ख्वाबों में ही खो गया।। वासना होती क्षणिक है, जलधार मे