
पानी – पानी
चहुंओर दिख रहा पानी – पानी कीचड़ से गीली चूनर धानी। बच्चे कागज की नौका दौड़ाये हाल नदी की वही पुरानी।। खतरों से वह खेल

चहुंओर दिख रहा पानी – पानी कीचड़ से गीली चूनर धानी। बच्चे कागज की नौका दौड़ाये हाल नदी की वही पुरानी।। खतरों से वह खेल

शब्द है कितना प्यारा हिंदीदेश है हिन्द भाषा मेरी हिंदीलेखन मेरी हिंदी पाठन मेरी हिंदीकहे कवि रहन सहन चलन मेरी हिंदी कहे हिंदी यहाँ जब

मुश्किल भरी राह जीवन की, आओ कुछ आसान बनाएं। कुछ तुम सीधे, कुछ हम ढीले, एकदूजे का सम्मान बढ़ाएं।। बच्चों की सीटी सा निश्छल, दे

क्या हुआ…, कुछ ख़बर नहीं ! दिल मेरा…., अब इधर नहीं ! काम तो ये तेरी निगाहों का होगा…, (क्योंकि….) बाक़ी कोई और दवा…, इधर

तुम्हारे शब्दों के लिहाफ में गरमी बहुत है lलेकिन फिज़ा में आजकल सरदी बहुत है ll ये धरती है बिछौना मेरा, चादर है आसमांजिस्म थक

जिंदगी के इस सफ़र की,कब सुबह और रात कब lसोचता है लूट कर, कैसी रही वह रात कल lआया नहीं, कोई भी मक़्सूद देखो इस

जब तुम पढ़ने लगो,दो पंक्तियों के बीच के खालीपन को ,जब तुम समझने लगो,दो शब्दों के बीच के भारीपन को llजब तुमको सुनाई देने लगे

सूरज भी चाँद बन यादों से उलझ गया है lतुम्हारी बातों का शजर जानें किधर गया है ll बैठते थे, दोनों के जज़्बात जिसपरबात सुन,चहचाती

क्या नव वर्ष कुछ बदलेगा?या सिर्फ तारीखें बदलेंगी,या माह करवटें लेंगें बस,या सिर्फ बधाई देंगें बस?क्या दुःख सुख की चादर ओढ़ेंगें?क्या कर्कश मधु की बातें

कमजोर कौन है!स्त्री या पुरुष!दोनों!या फिर कोई नहीं! क्या कमज़ोर होना,देह या लिंग आधारित होता है !या कमजोर होना स्वभाव है !या कमजोर होना एक