
बाँसुरी की तरह
आप साँसों में हो ज़िंदगी की तरह हर अँधेरे में हो रौशनी की तरह आपसे ही है कायम ये सारा जहां आप फूलों में हो

आप साँसों में हो ज़िंदगी की तरह हर अँधेरे में हो रौशनी की तरह आपसे ही है कायम ये सारा जहां आप फूलों में हो

उगते सुरज का वंदन है दुबते का भी वंदन है खुशीयों से सजा रहे हे नूतन वर्ष अभिनंदन है नया साल आया है हम नई

मिला है जो भी मुझे अब तक मेंरी माँ की दुआओं से मैं आसमां पर घर बनाऊगा मेंरी माँ की दुआओं से है रंज नही

बेटियां किसी से कम नहीं है इस जहान में वायुवान रेल तक चलाया है भारत महान में बेटियां अपने दम पर जँहा को जीत आई

मेरे हौसलों को लोग आजमाने में लगे हैं हम अपना आशियाना बनाने में लगे हैं परिन्दा हूँ आसमान में उड़ने की सनक है और साहेबान

मुझसे मिले हैं जो भी वो लुटने वाले मिले हैं खुदा शहर मे तेरे बहुत सारे शिकवे गिले हैं खुदा दर पर तेरे पंडित मुल्ला

विखराता सौरभ सुगंध मैं जोर – शोर से खिला हुआ। काँटों से भी मिला हुआ।। अभिलाषा मेरी यह है, सबको सुख दे जाने को शांति

इस शीत के मौसम में तुम जेठ दुपहरी बन आना। रोम-रोम में छा जाना।। मैं अवाक रह गया, देख तुम्हारी मूरत को कैसे उतारुँ दिल

इस हाड़ कँपाती ठंडक में यदि ऐसा कुछ हो पाता। उच्छ्वासों से साँस मिले तो सारा ठंडक खो जाता।। गर्माहट तन की पा करके थोड़ा

एक पत्थर और मारो अब तलक़ ज़िंदा हूँ मैं । या कोई ख़ंजर निकालो अब तलक़ ज़िंदा हूँ मैं । है बदन छलनी मगर इन