पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

बाँसुरी की तरह

आप साँसों में हो ज़िंदगी की तरह हर अँधेरे में हो रौशनी की तरह आपसे ही है कायम ये सारा जहां आप फूलों में हो

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कविता

वंदन

उगते सुरज का वंदन है दुबते का भी वंदन है खुशीयों से सजा रहे हे नूतन वर्ष अभिनंदन है नया साल आया है हम नई

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कविता

बेटियां

बेटियां किसी से कम नहीं है इस जहान में वायुवान रेल तक चलाया है भारत महान में बेटियां अपने दम पर जँहा को जीत आई

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पद्य-रचनाएँ

मेरे हौसलों को लोग आजमाने में लगे हैं

मेरे हौसलों को लोग आजमाने में लगे हैं हम अपना आशियाना बनाने में लगे हैं परिन्दा हूँ आसमान में उड़ने की सनक है और साहेबान

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कविता

तेरे शहर में गरीब के अस्मत भी बिके हैं

मुझसे मिले हैं जो भी वो लुटने वाले मिले हैं खुदा शहर मे तेरे बहुत सारे शिकवे गिले हैं खुदा दर पर तेरे पंडित मुल्ला

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कविता

पुष्प संदेश

विखराता सौरभ सुगंध मैं जोर – शोर से खिला हुआ। काँटों से भी मिला हुआ।। अभिलाषा मेरी यह है, सबको सुख दे जाने को शांति

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कविता

ऐसा कुछ हो पाता

इस हाड़ कँपाती ठंडक में यदि ऐसा कुछ हो पाता। उच्छ्वासों से साँस मिले तो सारा ठंडक खो जाता।। गर्माहट तन की पा करके थोड़ा

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गज़ल

गज़ल-एक पत्थर और मारो अब तलक़ ज़िंदा हूँ मैं ।

एक पत्थर और मारो अब तलक़ ज़िंदा हूँ मैं । या कोई ख़ंजर निकालो अब तलक़ ज़िंदा हूँ मैं । है बदन छलनी मगर इन

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