
ख़त
कई लोगों के ख़त आए पर एक तेरा नहीं आया l शायद इस बार भी डाकिया मेरा घर नहीं पाया ll बड़ी उम्मीद से देखा

कई लोगों के ख़त आए पर एक तेरा नहीं आया l शायद इस बार भी डाकिया मेरा घर नहीं पाया ll बड़ी उम्मीद से देखा

कुछ तो रोक रहा है मेरे दीवाने को, वरना कितना खाली है मैखाना उसे पिलाने को ll उसके पैरों में पड़ी हैं ज़माने की बेड़ियां,

वो मुस्कुरा देती है जब वो मुस्कुराता है न जाने कौन सा रिस्ता वो निभाता है सुकूँ से बेख़ौफ़ सा रहता है जब उसका अहसास

युग का युवा, अब धुंध, तम में खो रहा है , लक्ष्य साधे,आंख में सपने लिए सो रहा है l हर रोज़ हिम्मत की सड़क

एक चाँद रिश्ते हज़ार रखता है कभी एक ही इंसान से तो कभी कई रूपो में अलग अलग इंसान से कभी हम उससे रिश्ता जोड़ते

तुम्हारी याद आई तो है , कुछ उदासी छाई तो है ll आया तो है एक छोंका, हवा एक पैगाम लाई तो है ll बोलती

एक रात मैंने अंधियारे में, ख़ुद के अन्दर ख़ुद को देखा l थी लाश मेरी, मेरे अन्दर, थोड़ा मरते, जलते देखा ll निष्प्राण देह, गुमशुद

कभी आओ मिलो, बैठो l जरा सी गुफ्तगू कर लो l मेरे कंधों पर सर रख कर जरा सी शाम तुम कर दो l मेरे

बादल तोड़े खुद को देखो रुई में बदले खुद को देखो धरती रंगी श्वेत रंग से बर्फीली जन्नत तो देखो मोटी मोटी परत हो गयी

लकड़ी,उप्पल,रेवड़ी, लिए हुए ये लोहड़ी ll झूमें नाचें खुश हुयें l नुक्कड़ छप्पर झोपड़ी ll शरदी में गरमी लिए, जलती रही मसाल, दुल्ला भाटी की