
कब तक पाठ शान्ति का हमको
कब तक पाठ शान्ति का हमको,अभी पढ़ाया जायेगा।कब तक इन पत्थरबाजों से,हमको पिटवाया जायेगा।।कब तक हम अपने ही घर में,अत्याचार सहें बोलो।कब तक करते रहें

कब तक पाठ शान्ति का हमको,अभी पढ़ाया जायेगा।कब तक इन पत्थरबाजों से,हमको पिटवाया जायेगा।।कब तक हम अपने ही घर में,अत्याचार सहें बोलो।कब तक करते रहें

चाहतें थीं दिल में जो भी,जता न पाए हम कभी,मन तुम्हारा हो गया पर,बता न पाए हम कभी।इश्क़ का इज़हार कर लूं, तुमसे,दिल करता रहा,पर

करें बाँहों में बल पैदा,सहारा है नहीं कोई, ज़माने में कहीं देखो,तुम्हारा है नहीं कोई| हुई हैवान दुनिया है,मरी इन्सानियत सबकी, खुद ही में डूबकर

जो बदन थी दोहरी, इकहरी हो गई, ग़मों की धूप से हट जा, दुपहरी हो गई| प्यार उसका अभीतक, भूला नहीं पाया, ऐसा लगता है

साधक तिरस्कार-तम में हैंतिकड़मबाजों का अभिनन्दन! सीना ताने झूठ चल रहा/सच दुबका-सहमा कोने मेंजिसे देखिए वही लगा है/यहाँ स्वार्थ-बीज बोने मेंअर्थ कूच कर रहे शब्द

बाबू जी,मुझे फिर से वही बचपन चाहिए ।कि आप दफ़्तर से वापिस आओ,तो साथ में लाओ,मेरी ख्वाहिशों का इंद्रधनुष । अपनी ख़ाली जेबों के,वो खनकते

गंउआ के खुशी खातिर डिउहार का मनाइन जब जब परी बिपतिया तब तब दिया जराइन अम्मा कै अपने जेतना बखान करी कम है उनहीं तौ

तन-मन-धन सब,वार जिस दिन आप,काम कोई करने को,आगे बढ़ जाते हैं।पग-पग पर जब,आ जाए चुनौती कोई,फिर भी न पग आप,पीछे को हटाते हैं।आती परेशानियां हों,

मैं कहता हूं कि तुम भुला दो मुझे,कान्टेक्ट लिस्ट से हटा दो मुझे,ड्राइव से फोटो मिटा दो मेरी,गैलरी से पिक्चर हटा दो मेरी,सोशल साइट पर

गांव गांव गली गली नगर चौराहे देखो,हर दिशा मां की जयकार ही सुनाई है।जिधर भी नजरें देखोगे उठाके उधर,मातु दुरगे की भव्य मूरति सजाई है।रखते