
पर्व है रंगों का
पर्व है रंगों का मन को भी रंग लीजियेहोलिका भस्म हुई प्रहलाद को संग लीजिएभक्ति की शक्ति को सदा नमन रंग दीजिएनास्तिकता बदरंग है इसका

पर्व है रंगों का मन को भी रंग लीजियेहोलिका भस्म हुई प्रहलाद को संग लीजिएभक्ति की शक्ति को सदा नमन रंग दीजिएनास्तिकता बदरंग है इसका

रंग अनेकों होते तो हैँआँचल हर एक भिगोते तो हैँ कंही रंग प्रीत काकंही रंग रीत काकंही रंग मनमीत कादिखाई दे जाएदिल के झारोके जो

लेखक और उसकी लेखनीस्वतंत्र हो आजाद हो तो है घनी मुग़ल आये तो हिन्दुओं ने कमियां ज्यादा देखि या खूlबीयांसोचती तो होंगीलेखक और उसकी लेखनी

फागुन में मन बौरायामनवा बहुत ललचायावातावरण बना सुखमय सौंदर्य काखुशबू फूलों को भाया । फागुन के रंग में हम भी ढलेंराधा कृष्ण के संग चलेंखूब

होली इन्द्रधनुष जैसी चुनना कुछ रंग तुम उससे चुरा लेना एक रंग तुम मेहंदी का लेना रचा देना उन हथेलियों पर जिसका पति अभी अभी

कोरोना महामारी के द्वितीय चरण के भयावह दिनों के कुछ शब्द चित्र 1.सड़कों पर बेख़ौफ़ टहल रही है मौत |दिन होते ही पसर जाता है

एकअब लिखे नहीं जातेऔर न भेजे ही जाते हैं प्रेम पत्रकोई लिख भी लेता हो गुपचुपया मन ही मन गुन लेता हो ख़त का मज़मूनमगर

वे जब भी रोशनी में आते हैं,उन्हें मुँह चिढ़ाती है उनकी परछाईं |कभी छोटी, कभी बड़ी,कभी प्रश्नवाचक,कभी विस्मयादि मुद्राओं में आकार लेतीउन्हीं के अस्तित्व का

चाहो तो जड़ देना ताले दुनियां भर की किताबों पर लेकिन नहीं बना सकते तुम ऐसी कोई दीवार जो पहरे बैठा दे मुझ पर मैं

सृष्टि का उपहार है नारीनारी बिना सबकुछ सुना हैनारी तत्व ही दिव्य ज्योति हैउसके बिनासबकुछ अनसुना है। नारी तत्व से प्रेम निखरता हैनारी तत्व है