पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

बोल रहा इतिहास

चीखकर बोल रहा इतिहास तुम्हारे हाथों में भगवाधारी है भगवा की अब लाज तुम्हारे हाथों में बीत गया जो समय-समय से बुरी रात का सपना

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गीत

गीत तू

गीत तू मैं गुनगुनाऊ एहसास दिल की सुनाऊं है जहां में गम सभी को आ तुझको मैं दिखलाऊ गम है तुझको किस बात का हाथ

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कविता

गोपियों की निराशा

मिलता होगा छप्पन भोग खाने को मधुर वहांमाखन चुराने यहा क्यू अब आएगेसोने का मुकुट होगा अब तो उनके सिर परमोर का मुकुट सिर पे

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पद्य-रचनाएँ

होली- मुक्तक द्वय

खूब घुट रही प्रिय के प्रेम की लाली भंग रंग।कान्हा होली खेलन आ रहे प्रिया संग रंग ।स्पंदित मन छलक रहा आगमन से तुम्हारे,परमात्म मिलन

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कविता

फागुनी फुहार हो

रंग के संग भंग और हाथ में गुलाल होझूम रही सबके मन में फागुनी बयार होखेलते गुलाल सब ही गाते एक राग होटोलियों के पीछे

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