पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

आंखों का सागर

देखा मैंने सागर को जब तेरे इन दो नैनों मेंभाव मेरा तो भावुक होकर डूब गया तेरे नैनों मेंसागर की क्या गहराई होगी जितनी तेरे

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कविता

मेरे मन की बात

मेरे एहसास, मेरे शब्द,मेरी धड़कन, मेरे नब्ज।मेरा अपना, मेरा सपना,मेरी उम्मीदें, मेरी ख्वाहिशें।मेरा वजुद, मेरा सुकून,मेरी खुशी, मेरा जूनून।मेरा रब, मेरी प्रार्थना,मेरी दुआ, मेरा आसमां।मेरी

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कविता

संघर्ष ही जीवन

चिंता मत कर असफलता की मत पछताओ जीवन मेंजीवित रहना व्यर्थ है गर संघर्ष न हो इस जीवन मेंजीवन है दो दिन का मेला हस

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कविता

प्रेम रोगी

हे प्रेम ! की बहती हवाओं सुनोंमैं हूंँ नही कोई निरोगीमुझे बचालो उसके कदमों सेअब मैं हूंँ एक गुलाम प्रेम रोगी । अब खो रहा

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कविता

मांँ शारदे

मांँ शारदे करुण नयन सेमेरा जीवन उद्धार करोमुझ पर दया करो मातामेरा जीवन आभार करो । मैं मूढ़ ,मासूम जिसमेहै न साक्षरता का वासऔर कितने

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कविता

रायपुर की गलियों में

शहर से घटा बिखरता हुआघूम रहा चंचलियों मेंआज भी भटक रहा है मेरा दिलरायपुर की गलियों में । छत्तीसगढ़ की राजधानी मेंसूरज का तेज निखरता

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कविता

मानव धर्म

मानवता एक सच्चा धर्मार्थ हैनहीं कोई इससे बड़ा कर्मार्थ है।जाति धर्म से ज़रा हटकर देखो।मानव सेवा ही सच्चा परमार्थ है। मानवता सच्चा सेवा परोपकार है।जीव

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गज़ल

किससे किसकी यारी है

किससे किसकी यारी है दुनिया कारोबारी है ! जाल बिछा है, दाने हैं दुबका वहीं शिकारी है ! मंचों पर जोकर काबिज प्रहसन क्रमशः जारी

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गज़ल

दंश

अशेष अनुराग से गुड़िये को सजाती तुम बिसर जाती हो खाना-पीना बुदबुदाती है माँ झिड़कियाँ सुनाती है बेपरवाह, तन्मय तुम क्या कुछ गाती-गुनगुनाती हो रचाती

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