
सवाल ये है
झूठ मूठ के बहकावे सेदिल को अपने बचा के रखनाबहुत कठिन होती ये डगर हैकदम को अपने संभाल रखनातपन फिजाओं में अब बहुत हैंघुटन अंधेरे

झूठ मूठ के बहकावे सेदिल को अपने बचा के रखनाबहुत कठिन होती ये डगर हैकदम को अपने संभाल रखनातपन फिजाओं में अब बहुत हैंघुटन अंधेरे

भगाएं सभी सूनापन जिंदगी काचलो आज मिलकर के हम खेलते हैंये जीवन भी बन जाए सबका सुहानाचलो आज ऐसा जतन ढूढते है दिलों को दिमागो

बाहर से टूट भले जाओ पर अंदर से मजबूत रहोबल पौरूष कुछ घट जाए पर दिल इच्छा बलवान रहोटूट गये जो अंदर से तो बचा

डाल में बैठी चार गौरैया मंथन करती विषय अनेक कहां जाएं राहें तकें अनेक कहीं और है उनको जाना सारा जग है जाना पहचाना मंथन

गन्ना कै रस आवत होई डेउढी का महकावत होई लिहा गिलासी छोटका बबुआ गझिनै दहिउ मिलावत होई सुधि चैती बइसाख कै आवै दांत लड़कपन कै

गंउआ के खुशी खातिर डिउहार का मनाइन जब जब परी बिपतिया तब तब दिया जराइन अम्मा कै अपने जेतना बखान करी कम है उनहीं तौ

हमारे भारत में, गलत को गलत कहना भी,सबसे बड़ा पाप है, अपराध है। क्यों के कई बार प्रमाण से ज्यादा,अपने ज्ञान से ज्यादा,समझ, अपनी शिक्षा

मैं तो गांवो में ही रह कर गांव से हरदम प्यार कियाप्रकृति प्रदत हवा जो मिलती उसी में हरदम सांस लियानहीं तीव्रतम चाल मै देखी

मुझे गांव में रहने दो अपने में ही सिमटने दोछेड़ो ना मुझको तुम सब मिल गुमनाम सा जीवन जीने दोमुझे गांव में रहने दोगुमनामी का

आँसुओं से निर्झर अश्रु श्रँखला निर्बाध बह चली मानों दोनो के मध्य संधि अनुबंध करार बना चली अविरल अश्रु धारा मानों तटीबन्ध तोड़ बस चली