नवगीत

Category: नवगीत

नवगीत

चेहरे कितने रूपहरे

बस एक चेहरा थाबेशक रूपहरा थाकोई खास किरदार नहींचेहरा भ्रांत,क्लांत,अशांतकिसी परिभाषा में नहींचेहरा जिस परसंवेदना का रेखांकन नहींएक छवि भर हैचेहरे का कोई चरित्र नहींचेहरा

विस्तार से पढ़ें »
नवगीत

सारियाँ

भारतीय परिधान सुंदर क्यों विमुख हैं नारियां खूब फबती सारियाँ ।। माँग में सिंदूर लठवा, तन सुशोभित सारी लसे देखकर मन पथिक का, बरबस उसी

विस्तार से पढ़ें »
नवगीत

मदारी

कैद कर कब तक रखोगे मैं सदा दुनियां से हारी क्या कर रहा पागल मदारी।। प्रतिबंध पग-पग पे लगाया, लगाम तूं इतना कसा असत् जाल

विस्तार से पढ़ें »
नवगीत

मजा है तबसे

प्रेम दिलों में जगा है जबसे दर्द दिलों का बढा है तबसेओ जब से समझा है प्यार मेरा मजा है जीने में और तब सेदिलों

विस्तार से पढ़ें »
नवगीत

आओ हम सब दीप जलाएँ

घिरे हुए अंतर तन मन में ज्ञान प्रेम की ज्योति जलाएँरहे अंधेरा कहीं नहीं अब जग में उजियारा फैलाएँमैंले कुचले दबे हुए जो उनमें भी

विस्तार से पढ़ें »

ख़ैरियत

राह चलते या कहीं बाज़ार में पूछता है ख़ैरियत जब कोई परिचित भर आता है मन सोचता हूँ , खोल कर रख दूँ सभी गोपन-

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!