Dr. Mukund Kumar
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Dr. Mukund Kumar (Bihar) Copyright@Dr. Mukund Kumar/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है | Master of Arts from, The Department of Economics, BRA, Bihar University, Muzaffarpur; M. Phil & Ph.D from ICFAI Group, Hyderabad and Dehradun; UGC-NET in Economics; Asst. Professor, Department of Economics. Dr.LKVD, College, LN Mithila University, Darbhanga.

चल मनोरमे एक उम्र पूरा हुआ

चल मनोरमे एक उम्र पूरा हुआ।। अब दूसरे की दुआ राम से माँगने चले।अपने मित्रों के साथ चैतावर गाने चले।अपने- अपने बिटिया रानी,के नयनो में,राधा

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प्राकृतिक मिलन

मिलता है, जब कोई भंवर किसी कलि से प्यार मेंकली हिचकिचाती है, मगरथी तो वो भी, कबसे, इस घड़ी के इंतजार में, फिर खोलती है,

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जोगीरा

मेरे गुरु, भोले भंडारी, उनके गुरु गोसाई।बज्रिका मेरी वैशाली वाली, मिथिला वाली, सीतआमाईअब सुनो जोगीरा, भाई।जोगीरा स र र र र जोगीजी, जोगीजी वाह जोगीजी,राधा,

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सुन री मेरी मनोरमे

सुन री मेरी मनोरमे, नव वर्ष का आना बाँकी है,हिन्द व हिंदी माँ, उर्दू जैसी मौसियों, को मनाना है। बसंत पंचमी से, माँ का पद

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गर्व से बिहारी हैं

परीक्षा भी स्व इच्छा से देने वाले।डॉ राजेन्द्र प्रसाद के बिहार वाले।उन्हीं की ज़ुबान, में उनकी ही,बोलती बंद, कराते हैं,यूँ ही नहीँ हम, मैं तुम

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हम अपनी दौलत लूटा रहे है

कवन, बिधि करू, मुकुन्द हम, तोड़ बड़ाई,कबहुं, प्रेम, कभी करू, लड़ाई,तोड़ प्रीति, सुनु हरजाई,मोरे मन ही मन मे, हेराई।। अब, करहु सनाथ, राम रघुराई।हे, अ

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