विदाई
खट्टी मीठी यादों को सहेज
आज विदाई की बेला आई है
हैं हर्ष भी, विषाद भी !
जाने क्यों आंख भर आई है
है लोग प्रतिक्षा में
कुछ विदाई को आए है
कैसे कह दूं अलविदा
दिलो में जो घर बनाए है
हां,थी शिकायत मुझे भी,उसे भी
आज भुनाने आए है
रहेगा याद दोनो को
आंख के आंसू बताने आए है
बनेगा गवाह हमदोनो के मिलन का
हिलते हाथ बताने आए है
-डाॅ. शंकर सुमन
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