चेहरे कितने रूपहरे

बस एक चेहरा था
बेशक रूपहरा था
कोई खास किरदार नहीं
चेहरा भ्रांत,क्लांत,अशांत
किसी परिभाषा में नहीं
चेहरा जिस पर
संवेदना का रेखांकन नहीं
एक छवि भर है
चेहरे का कोई चरित्र नहीं
चेहरा जिसका हृदय नहीं
चेहरा जिसकी केवल चेहरा पहचान
चेहरा जो घटनाएं पी जाता है
चेहरा जो रोज रंग पूत कर आता है
चेहरा जो ठगता है
चेहरा जिसका गुण धर्म नहीं
जिसका अपना कोई मर्म नहीं
चेहरा व्यवसायी की चाल सा
चेहरा बस चेहरा कमाल सा

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रचनाकार

Author

  • त्रिभुवनेश भारद्वाज "शिवांश"

    त्रिभुवनेश भारद्वाज रतलाम मप्र के मूल निवासी आध्यात्मिक और साहित्यिक विषयों में निरन्तर लेखन।स्तरीय काव्य में अभिरुचि।जिंदगी इधर है शीर्षक से अब तक 5000 कॉलम डिजिटल प्लेट फॉर्म के लिए लिखे।

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